Jain tattva gyan

Avsharpini Kal

🌸💐🌸💐🌸💐🌸💐 पहेलो अ1रो = 4कोडाकोडी सागरोपम वर्ष बीजो आरो = 3कोडाकोडी सागरोपम वरस तीजो आरो= २ कोडाकोडी सागरोपम वरस मा 89 पक्ष बाकि हता( पोना चार वरस बाकि) त्यारे आदिनाथ भगवान निर्वाण थया🙏 चौथो आरो = 1  कोडाकोडी सागरोपम वरस मा 42 हजार वरस ओछा       (89पक्ष बाकि त्यारे महावीर…

Shree Ranakpur Tirth

Shree Ranakpur Tirth

श्री राणकपुर तीर्थ / Shree Ranakpur Tirth राजस्थान के पाली जिले में सादड़ी से दस किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में मघई नदी के किनारे प्राकृतिक सुषमा से आच्छादित आरावली पर्वतमालाओ की सुरम्य गोद में स्थित राणकपुर का भव्य मंदिर मध्यकालीन शिल्प वैभव का दर्शनिय व अनूठा चौमुखा मंदिर है। लगभग पचास…

Bhaktāmara today’s discussion on taking zārī….

Bhaktāmara today’s discussion on taking zārī….

क्तामर पर आज की विवेचना ज़ारी रखते हुए …?Bhaktāmara today’s discussion on taking zārī…. ? ॥ क्रमांक “३ ” ॥ ? राजा भोज की कारागृह में बंदी बने आचार्य श्री मानतुंगसुरिस्वर जी म. सा. ने, इस अवसर्पिणी काल के प्रथम तीर्थंकर प्रभु श्री आदिनाथ दादा की स्तवना-रूपे, चमत्कारी मंत्र-युक्त भक्तामर…

Speed ” name of the rise of the state of the organism-/ says to speed! Velocities are 4

Speed ” name of the rise of the state of the organism-/ says to speed! Velocities are 4

चार गति गति” नाम-कर्म के उदय से प्राप्त होने वाली जीव की अवस्था/पर्याय को गति कहते हैं ! गतियाँ ४ होती हैं :- १ – नरकगति २ – तिर्यंचगति ३ – देवगति, और ४ – मनुष्यगति १ – नरकगति नरकगति-नामकर्म के उदय से नरक में जन्म लेना नरकगति कहलाती है…

उर्ध्व लोक वर्णन | Jain Khagol – sky

उर्ध्व लोक वर्णन | Jain Khagol – sky

उर्ध्व लोक वर्णन | jain khagol सुदर्शन मेरु पर्वत के शिखर की चोटी के एक बाल के अन्तर से प्रथम स्वर्ग ऋतु विमान हैं, वहीं से उर्ध्व लोक का प्रारंभ होता है। स्वर्गों में दो दो युगल स्वर्ग अर्थात आठ जोड़ों या युगलों में सोलह स्वर्ग हैं, यों सब स्वर्ग…

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