Sadhu Pad 27 Gun | Navpad Aaradhna

Sadhu Pad 27 Gun | Navpad Aaradhna

Sadhu Pad 27 Gun | Navpad Aaradhna

साधु पद के 27 गुणों

 

                    साधु भगवंत की आराधना को प्राणवंती बनाने के लिये उनका संक्षिप्त परिचय… साधु पद अरिहंत, सिद्ध, आचार्य एवं उपाध्याय की जन्मभूमि है, साधु बने बिना ऊपर के कोई पद प्राप्त नहीं हो सकते। साधु-साध्वीजी सत्ताइस गुण के धारक होते है, साधु संयम रूपी चद्दर पर कभी दाग न लगे, इसके लिए सदा जागृत रहते है। जिनशासन गुण प्रधान है, वेश प्रधान नहीं, इसी विषय में पू उपाध्याय यशोविजयजी म. सा. ने लिखा है, संयम खप करता मुनि नमिये रे, गुणों से युक्त मुनि ही वंदनीय, नमनीय है।  साधू-साध्वी भगवंत अरिहंत की राह पर है, वे हमें भी उसी राह की ओर ले जाने का निरन्तर प्रयास में लगे रहते हैं, वे हमारे प्रेरक है ,पूरक है ,बीना उनके सानिध्य के हम अनाथ समान है। हमें पाप कर्मों से बचाकर, पूर्व पापकर्मों से भी मुक्त करने की चेष्टा करने वाले सभी साधू-साध्वी भगवंतों को हृदय से वंदन करते हैं।  साधु के २७ गुण जानिए और अंतर से अनुमोदन करें….

१) सर्वथा प्राणातिपात विरमण महाव्रत

२) सर्वथा मृषावाद विरमण महाव्रत

३) सर्वथा अदत्तादान विरमण महाव्रत

४) सर्वथा मैथुन विरमण महाव्रत

५) सर्वथा परिग्रह विरमण महाव्रत

६) सर्वथा रात्रिभोजन विरमण व्रत

७) पृथ्वीकाय की रक्षा करने वाले

८) अपकाय की रक्षा करने वाले

९) तेउकाय की रक्षा करने वाले

१०) वाउकाय की रक्षा करने वाले

११) वनस्पतिकाय की रक्षा करने वाले

१२) त्रसकाय की रक्षा करने वाले

१३) स्पर्शनेन्द्रिय के निग्रह करने वाले

१४) रसनेन्द्रिय के निग्रह करने वाले

१५) घ्राणेन्द्रिय के निग्रह करने वाले

१६) चक्षुरेन्द्रिय के निग्रह करने वाले

१७) श्रोतेन्द्रिय के निग्रह करने वाले

१८) लोभ का त्याग

१९) क्षमा की धारणा

२०) चित्त की निर्मलता

२१) शुद्धता पूर्वक वस्त्रपडिलेहण

२२) संयम योग में प्रवृत्त

( पांच समिति त्रण गुप्ति का पालन)

२३) मन को स्थिर करने वाले

२४) वचन को स्थिर करने वाले

२५) काया को स्थिर करने वाले

२६) २२ परिषह के सहन करने वाले

२७) मरणादि उपसर्ग को सहने वाले

 

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